कुछ खास नहीं कवि पिता की संतान हूँ । ..... निर्दलीय प्रकाशन भोपाल द्वारा बर्ष 2012 में "युवा सृजन धर्मिता अलंकरण" से अलंकृत। जन चेतना साहित्यिक सांस्कृतिक समिति पीलीभीत द्वारा 2017 श्रेष्ठ रचनाकार से सम्मानित कव्य रंगोली त्रैमासिक पत्रिका लखीमपुर खीरी द्वारा साहित्य भूषण सम्मान 2017 से सम्मानित "निश्चल" मन से निश्छल लिखते जाओ । ..... . (रचनाये मौलिक स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित .)
मंगलवार, 22 सितंबर 2020
मंगलवार, 18 अगस्त 2020
रूठ रहे है शब्द नये सभी
रुठ रहे है शब्द नये सभी ,
यादों को साझा करता हूँ ।
तपिश बड़ी है अहसासों की ,
वादों की छायाँ करता हूँ ।
चल कर एकाकी पथ पर ,
मंजिल को जाया करता हूँ ।
भोर मिलन की आशा में ,
मैं साँझ तले आया करता हूँ ।
कट जायेगी ये रात अंधेरी ,
आशाओं की आभा करता हूँ ।
ठहरा हूँ मैं एक साँझ तले ,
भोर मिलन का वादा करता हूँ ।
"निश्चल"जीतूंगा हर मुश्किल से ,
संकल्पों से मंजिल पाया करता हूँ ।
...."निश्चल"@....
कलम चलती है शब्द जागते हैं।
सम्मान पत्र
मान मिला सम्मान मिला। अपनो में स्थान मिला । खिली कलम कमल सी, शब्दों को स्वाभिमान मिला। मेरी यूँ आदतें आदत बनती गई । शब्द जागते...








































































