मंगलवार, 1 मार्च 2016

देश बचाना होता है


न चले जब शास्त्र से काम
 तब शस्त्र उठाने होता हैं
 देश बचाना होता है
 धर्म बचाना होता है
 गीता को अपनाना होता है
 चाणक्य को जागना होता है
 बन राम धनुष उठाना होता है
 वीर शिवा सा बन जाना होता है
 परवाह नही तब प्राण की
 हर शत्रु से टकराना होता है
   .... विवेक .....

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

शत्रु का संहार करो



नही तनिक भी मेरी परवाह करो
 शत्रु आ छुपे जब मेरे पीछे तब
तुम पहले मुझ पर ही प्रहार करो
 करो करो बस शत्रु का संहार करो
    .... विवेक ....

बुधवार, 24 फ़रवरी 2016



         तुम मेरी प्रेरणा हो या नही ,

            यह नही जानता मै ।

           हाँ इतना पता है मुझे ,

            तुम से मैंने सीखा बहुत है ।

        .....विवेक ..... 
                                     

न सोचें हम कुछ न सोचो तुम कुछ


न हम सोचें अब कुछ
 न तुम सोचो अब कुछ
 होता है हो जाने दो
 एक गुलामी फिर आने दो
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जलता है देश जल जाने दो
 बंटता है समाज बंट जाने दो
 शकुनि की चलें चल जाने दो
 फिर खण्ड खण्ड हो जाने दो
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जीवित कंस हो जाने दो
 धृतराष्ट्र को स्वप्न सजाने दो
 आयें कृष्ण धरा पर फिर
 आने का एक बहाना दो
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   ••••• विवेक ••••••

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

नमन नमन तुम्हें नमन


( वीर जवान तुम्हे अर्पित श्रद्धा सुमन)
.
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नहीं चली थी कोई गोली
फिर भी
वो सुहागन विधवा हो ली
खोया माँ ने लाल
अनाथ हुआ नौनिहाल
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पूछो पूछो उनसे एक सवाल
अपनी सुख सुविधा पर
खूब लुटाते हो
अपने लिए हर सुख सुबिधा जुटाते हो
.
माँ के इन सच्चे बेटों को
तुम क्या इतना कर पाते हो
जो आज भी जुगाड़ से
अपने हथियार चलाते हैं
.
... विवेक ...
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सज़ल नयन करते नमन
मेरे यह श्रद्धा सुमन
अर्पित करता मैं श्रद्धांजलि
नमन नमन कोटिशः नमन
.... विवेक ,...
February 11

हे माँ ज्ञानदा ऐसा वर दे


               
               


                  हे माँ ज्ञानदा ऐसा वर दे ।
                  हृदय ज्ञान प्रकाश से भर दे ।

          इस कलम में हो तेरा वास ।
          मेरे शब्दों में तू आशीष भर दे।

                         मार्ग सत्य पर चलता जाऊँ ।
                          सत्य से मैं न डिग पाऊँ ।

          लिख जाऊँ कुछ ऐसा ।
          शब्द अमर सा हो जाऊँ ।

                                             ....विवेक...

हे माँ ज्ञानदा


माँ ज्ञानदा ज्ञान दे ,
 शब्दों का वरदान दे ।
 कहूँ न अभिमान से ,
 कलम का स्वाभिमान दे ।
   .... विवेक ....

मधु मास आया है


मधु मास आया है
कलियों पर यौवन छाया है
 भंवरों से मिलने को
 आतुर कलीयों की काया है
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आज मन बौराया है
 भंवरों ने प्रणय गान गया है
 धरा सजी दुल्हन सी
 देख गगन भी शरमाया है
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 देख श्रंगार धरा का
 चन्दा ने खुद को पिघलाया है
 पुष्पित सुरभित आज धरा
 चन्दा ने प्रणय रस बरसाया है
    ---
   ..... विवेक ....


शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

जीवन की परिभाषा


मन समझे मन की भाषा ।
 नयन पढ़ें नैनों की भाषा ।
  न कोई आशा न अभिलाषा।
 ज़ीवन की इतनी सी परिभाषा।
       ......  विवेक ...

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

मंज़िले बैचेन है तेरे आगमन को


थक न तू हार न तू
अपने हुनर को न बिसार तू
होंसलों को कांधे से न उतार तू
तू चाँद है अम्बर का
तू सूरज है नील गगन का
तू झोंका है मस्त पवन का
तू नीर है सागर के तन का
चल चला चल न रोक
अपने कदम को
मन्ज़िलें बेचैन तेरे आगमन को
....विवेक...

ख़ुशी माँ की


क्या चीज़ है यह आँसू ,,
गम में छलक पड़ते है ,,,
ख़ुशी में ढलक पड़ते है ,,,,
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( छोटी बेटी का 12th bio. school top 90% आने पर माँ की ख़ुशीयाँ ढलक पड़ी )
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""जननी ही संस्कारो की भी जनक होती है ,
मिले जो संस्कारो का शुभ फल
तो ख़ुशी आँखों से वयां होती है
बरसते है ख़ुशी के मोती
जुवान चुप, बात आँखों से वयां होती है
सच है माँ तो बस माँ होती है ""
May 25, 2015 at 1:37pm ·

शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

खुशियों के गीत लिखूं


खुशियों के गीत लिखूं ।
............. यादों के संगीत लिखूं ।
 विरह भरी वो रात लिखूं ।
 ........मधुर मिलन की याद लिखूं ।
.
 स्वप्न संजोती साँझ लिखूं ।
.... भुंसारे की अलसाई आँख लिखूं ।
 अहसासों के हर अहसास लिखूं।
..............खासों में तू खास लिखूं ।
.
 तुझ पर फिर एक गीत लिखूं ।
 ......हृदय बसा हर एहसास लिखूं।
 स्वप्न सलोनी वो याद लिखूं।
 ......... प्रियतम से फ़रियाद लिखूं।
.
 तुझको मन मीत लिखूं ।
...............कैसी यह प्रीत लिखूं।
 खुशियों के गीत लिखूं  ।
..............यादों के संगीत लिखूं  ।
   ....विवेक...
 ब्लॉग पोस्ट 17/1/16

शनिवार, 16 जनवरी 2016

खेल उसका

   किस ने क्या खोया क्या पाया
   यह कोई न जान पाया
    यह तो बस जाना उसने
     जिसने मुझे बनाया
      तुझे बनाया
     अपनी सत्ता का
      खेल रचाया
    ... विवेक ...
     
..

कलम चलती है शब्द जागते हैं।

सम्मान पत्र

  मान मिला सम्मान मिला।  अपनो में स्थान मिला ।  खिली कलम कमल सी,  शब्दों को स्वाभिमान मिला। मेरी यूँ आदतें आदत बनती गई ।  शब्द जागते...