रविवार, 11 फ़रवरी 2018

दिया जलता है


     दीया जलता है ,
                 रौशनी बांटता है ।
      खुद नीचे अपना ,
               अंधेरा काटता है ।।
               ....
यह सब समय तय करता है ।
कब किसको क्या करना है ।
न मैं करता कुछ न तू करता कुछ ,
सब कुछ बस  वो ही करता है ।
 ...
कब कुछ कह जाते हैं ।
ज़ीवन की इस उलझन मे,
कब कहां खो जाते हैं ।
कुछ समझ नही पाते हैं ।

....
मन समझे मन की भाषा ।
 नयन पढ़ें नयनं की भाषा ।
  न अभिलाषा न कोई आशा।
 ज़ीवन की इतनी सी परिभाषा।

       ......

      काबिल वो नही,
      जो क़ाबिल-ऐ-तारीफ है ।
      क़ाबिल तो वो है,
      जो तारीफ-ऐ-आम करते है ।

          .....विवेक दुबे "निश्चल"©.....

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