ज़िन्दगी को जिया मैंने ऐसे ।
हसरतों को कब्र किया जैसे ।।
शुकुं मिला बहुत मगर चैन न पाई ।
ज़िन्दगी देती रही मौत की दुहाई ।।
....विवेक दुबे"निश्चल"©...
हसरतों को कब्र किया जैसे ।।
शुकुं मिला बहुत मगर चैन न पाई ।
ज़िन्दगी देती रही मौत की दुहाई ।।
....विवेक दुबे"निश्चल"©...
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